सड़क पर शेर: डर नहीं, एक सवाल
जब किसी शहर की सड़क पर शेर दिखाई देता है, तो पहली प्रतिक्रिया डर की होती है।
लोग रुक जाते हैं, मोबाइल निकल आते हैं, दिल तेज़ धड़कने लगता है।
आख़िर शेर जंगल का राजा है, और सड़क इंसान की।
लेकिन उस वायरल दृश्य को ध्यान से देखें —
शेर भाग नहीं रहा था।
शेर हमला नहीं कर रहा था।
वह बस चल रहा था, शांति से, अपने कदमों में कोई जल्दबाज़ी नहीं।
तो फिर सवाल उठता है —
क्या सच में डरने की वजह शेर है?
या डर की असली वजह कुछ और है?
शेर भटका नहीं था, सीमाएँ बदली गई थीं
शेर अपनी जगह से नहीं भटका।
उसकी राह नहीं बदली।
असल में हमने अपनी सीमाएँ आगे बढ़ा दीं।
जहाँ कभी घना जंगल था,
वहाँ अब सड़क है।
जहाँ कभी शिकार की गंध थी,
वहाँ अब पेट्रोल और सीमेंट की महक है।
शेर जब सड़क पर आता है,
तो वह इंसान के इलाके में नहीं घुसता —
इंसान उसके इलाके तक पहुँच चुका होता है।
डर का सच: ताकतवर नहीं, असहाय
विडियो देखकर ऐसा लगता है जैसे शेर ताकत दिखा रहा हो,
लेकिन सच्चाई इसके उलट है।
वह अकेला है।
अपने झुंड से दूर।
चारों ओर शोर, रोशनी और अजनबी चेहरों से घिरा।
उसके लिए सड़क कोई रास्ता नहीं,
एक मजबूरी है।
हम शेर से डरते हैं,
लेकिन शायद शेर हमसे ज़्यादा डरा हुआ होता है।
इंसान की चुप्पी और शेर की मौजूदगी
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि
शेर की मौजूदगी ने हमें एक पल के लिए चुप करा दिया।
कोई हॉर्न नहीं,
कोई शोर नहीं,
कोई जल्दी नहीं।
जैसे सबको याद आ गया हो कि
हम इस धरती पर अकेले नहीं हैं।
वह एक पल था
जब इंसान ने ताकत नहीं,
संयम दिखाया।
यह घटना चेतावनी है, रोमांच नहीं
इस दृश्य को सिर्फ रोमांच या डर की कहानी बना देना आसान है,
लेकिन यह एक चेतावनी है।
अगर जंगल ऐसे ही घटते रहे,
तो आज शेर सड़क पर है —
कल शायद और जानवर।
और तब सवाल यह नहीं रहेगा कि
जानवर शहर में क्यों आया,
सवाल यह होगा कि
शहर जंगल तक क्यों पहुँच गया।
अंत में: शेर नहीं, आईना
सड़क पर चलता शेर हमें डराने नहीं आया था।
वह हमें देखने आया था —
जैसे एक आईना।
जिसमें हम अपनी बढ़ती सीमाएँ,
अपनी लापरवाही,
और अपनी जिम्मेदारी देख सकें।
अगर हम उस सवाल को समझ लें
जो शेर बिना बोले पूछ रहा था,
तो शायद अगली बार
किसी शेर को सड़क पर आने की ज़रूरत ही न पड़े।
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