Wednesday, December 24, 2025

कुलदीप यादव: मेहनत की शांत जीत

 

कुलदीप यादव: मेहनत की शांत जीत

क्रिकेट की दुनिया अक्सर शोर पसंद करती है।🦖
छक्कों की गूंज, तेज़ रफ्तार गेंदें और बड़ी-बड़ी सुर्खियाँ।
लेकिन कुछ जीतें ऐसी होती हैं जो शोर नहीं करतीं —
वे चुपचाप आती हैं और दिल में उतर जाती हैं।

कुलदीप यादव की कहानी भी कुछ ऐसी ही है।

जब सब देख रहे थे, तब भी कोई नहीं देख रहा था

कभी ऐसा वक्त भी आया जब कुलदीप को मौका कम मिला।
टीम बदली, मैच बदले, चेहरे बदले।
कभी वह प्लेइंग इलेवन से बाहर रहे,
तो कभी सिर्फ बेंच पर बैठे।

उस समय कोई कैमरा उनकी मेहनत नहीं दिखा रहा था।
कोई तालियाँ नहीं थीं।
सिर्फ मैदान, गेंद और लंबा इंतज़ार था।

यहीं से उनकी असली परीक्षा शुरू हुई।

हार मान लेना आसान था

जब लगातार मौके न मिलें,
तो आत्मविश्वास डगमगाने लगता है।

आस-पास से आवाज़ें आती हैं —
“अब शायद वक्त निकल गया।”
“नए खिलाड़ी आ गए हैं।”

लेकिन कुलदीप ने उन आवाज़ों से बहस नहीं की।
उन्होंने बस अभ्यास किया।
खामोशी से, रोज़।

वापसी जो शोर नहीं मचाती

जब कुलदीप ने फिर से गेंद थामी,
तो उसमें जल्दबाज़ी नहीं थी।

हर गेंद में धैर्य था।
हर विकेट में इंतज़ार।

वह जीतने के लिए नहीं,
अपना काम करने के लिए उतरे।

और धीरे-धीरे😀
विकेट गिरते गए।

बिना जश्न,
बिना दिखावे।

यह कहानी सिर्फ क्रिकेट की नहीं है

कुलदीप की जीत उन सबकी कहानी है
जो मेहनत तो करते हैं,
लेकिन तुरंत नज़र नहीं आते।

उन लोगों की
जो ऑफिस में देर तक रुकते हैं,
जो खेत में चुपचाप पसीना बहाते हैं,
जो पढ़ाई में बार-बार असफल होकर भी रुके रहते हैं।

यह जीत बताती है कि
हर मेहनत को मंच नहीं मिलता,
लेकिन हर मेहनत का फल होता है।

शांत जीत की ताकत

जब जीत शोर नहीं करती,
तो वह ज़्यादा देर तक टिकती है।

कुलदीप ने साबित किया कि
आपको सबसे आगे दिखने की ज़रूरत नहीं,
बस लगातार आगे बढ़ते रहना ज़रूरी है।

उनकी सफलता में कोई जल्दबाज़ी नहीं थी,
सिर्फ भरोसा था —
अपने आप पर।

अंत में: भरोसा, जो साथ नहीं छोड़ता

कुलदीप यादव की कहानी👁
एक भरोसे की कहानी है।

खुद पर भरोसा,
मेहनत पर भरोसा,
और समय पर भरोसा।

जब सब कुछ शांत होता है,
तभी असली जीत जन्म लेती है।

No comments:

Post a Comment

कुलदीप यादव: मेहनत की शांत जीत

  कुलदीप यादव: मेहनत की शांत जीत क्रिकेट की दुनिया अक्सर शोर पसंद करती है।🦖 छक्कों की गूंज, तेज़ रफ्तार गेंदें और बड़ी-बड़ी सुर्खियाँ। ल...