Friday, June 13, 2025

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यह रहा Ahmedabad Plane Crash पर आधारित एक नया ब्लॉग पोस्ट, जिसे आप वेबसाइट, न्यूज़ ब्लॉग या सोशल मीडिया पर उपयोग कर सकते हैं:


अहमदाबाद प्लेन क्रैश: चाय की टपरी पर सोया था बेटा, विमान गिरा तो जलकर राख हो गया सपना

13 जून की सुबह अहमदाबाद के मेघाणी नगर में एक भयानक हादसा हुआ जिसने न सिर्फ पूरे शहर बल्कि पूरे देश को हिला कर रख दिया। एयर इंडिया के ड्रीमलाइनर 787-8 विमान ने जैसे ही टेक-ऑफ किया, तकनीकी खराबी के चलते वह रिहायशी इलाके में आकर गिर पड़ा। हादसे में 242 यात्रियों में से सिर्फ एक व्यक्ति ही जिंदा बच पाया, लेकिन असली दर्द उस ज़मीन पर रहने वालों को हुआ, जिनका इस हादसे से कोई लेना-देना नहीं था।

चाय की टपरी पर सो रहा था बेटा, वहीं आ गिरी मौत

घटना की सबसे मार्मिक तस्वीर तब सामने आई जब पता चला कि 19 वर्षीय इरफान अपनी मां की चाय की टपरी पर ही सो रहा था। गर्मी के कारण वह रात यहीं पर सो गया था। सुबह जब विमान नीचे गिरा, तो सबसे पहले आग उसी टपरी को अपनी चपेट में ले गई। इरफान को बचाने दौड़ी मां रजिया बानो भी बुरी तरह झुलस गई हैं और अस्पताल में ज़िंदगी और मौत से लड़ रही हैं।

हादसे की वजह क्या थी?

एयर इंडिया के इस विमान ने सुबह 6:10 बजे अहमदाबाद एयरपोर्ट से उड़ान भरी थी। प्रारंभिक रिपोर्ट्स के अनुसार, टेक्निकल फॉल्ट और इंजन फेल्योर की वजह से विमान ने ऊंचाई नहीं पकड़ी और सीधे मेघाणी नगर के पास एक घनी बस्ती पर गिर गया। अब DGCA (नागरिक उड्डयन महानिदेशालय) और एयर इंडिया की संयुक्त टीम जांच में जुट गई है।

आग की लपटों में समा गया सब कुछ

विमान के गिरते ही चारों तरफ आग की तेज़ लपटें फैल गईं। स्थानीय लोग कुछ समझ पाते, उससे पहले आग ने कई झुग्गी-बस्तियों को घेर लिया। फायर ब्रिगेड की 15 गाड़ियों और 100 से ज्यादा जवानों ने तीन घंटे की मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया। लेकिन तब तक कई घर जलकर राख हो चुके थे।

सरकार की प्रतिक्रिया

मुख्यमंत्री ने तुरंत आपात बैठक बुलाई और मृतकों के परिजनों को 10 लाख रुपये और घायलों को 2 लाख रुपये की मदद की घोषणा की। पीएम नरेंद्र मोदी ने भी ट्वीट कर हादसे पर दुख जताया और कहा कि "जांच के बाद कड़ी कार्रवाई की जाएगी।"


निष्कर्ष:

इस हादसे ने एक बार फिर से हमें याद दिलाया कि तकनीक और मशीनों पर भरोसे के साथ-साथ उनकी निगरानी और मेंटेनेंस भी उतनी ही ज़रूरी है। चाय की टपरी पर सोता एक मासूम बेटा, जिसे नहीं पता था कि उसकी नींद हमेशा के लिए अंतिम बन जाएगी—यह कहानी सिर्फ एक परिवार की नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम के सवालों की कहानी है।


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